हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मोरारी बापू की रामकथा का भावपूर्ण समापन

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नई दिल्ली। विश्व विख्यात हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा अनुष्ठान का समापन हो गया। पहली बार विदेश में आयोजित तुलसी जयंती महोत्सव के अंतर्गत चल रही कथा के अंतिम दिन कथावाचक मोरारी बापू ने गुरु प्रसाद, शिक्षा, दीक्षा और भिक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा संपूर्ण रामकथा को विश्व शांति और विश्व विश्रांति के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को समर्पित किया।

कथा के समापन अवसर पर बापू ने कहा कि वे पढ़ाने या उपदेश देने नहीं, बल्कि नामप्रसाद और हरिप्रसाद बांटने आए हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का प्रसाद मनुष्य को पांच प्रकार की शिक्षा, पांच दीक्षा और पांच प्रकार की भिक्षा प्रदान करता है। शिक्षा के रूप में विद्या, विनय, निपुणता, गुण और शील प्राप्त होते हैं, जबकि दीक्षा में शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध का बोध मिलता है।

बापू ने बताया हमें व्यास पीठ पर पांच वस्तु पर ध्यान रखना चाहिए:शब्द देवता,सूर देवता,स्वर देवता,लय के देवता और ताल देवता का ध्यान रखना चाहिये। भूल का स्वीकार न करना सबसे बड़ी भूल है। गाते और सुनते वक्त मिले सूत्रों में हम सावधान रहे देह से और नेत्रों से प्रेम करते हैं तो वियोग लगेगा, लेकिन आत्मा से प्रेम करते हैं तो वियोग नहीं लगेगा ऐसा रूमी ने कहा है।

बापू ने कहा विचारों का भी परिग्रह न करें। मैं पढ़ने,पढ़ाने नहीं, प्रसाद बांटने आया हुं। नाम प्रसाद और हरिप्रसाद वितरित करने आया हूं। आरंभ में गुरु प्रसाद जानकारी प्रदान करता है।मध्य में गुरु प्रसाद विद्या देता है और अंत में घर और वन में हमारी रक्षा करता है। गुरु का प्रसाद पांच प्रकार की शिक्षा,पांच दीक्षा और पांच प्रकार की भिक्षा देता है।यह पांच शिक्षा में विद्या, विनय, निपुणता, गुण और शील मिलता है। गुरु प्रसाद के रूप में पांच दीक्षा में शब्द दीक्षा,स्पर्श,रूप रस और गंध दीक्षा मिलती है।

पांच प्रकार की भिक्षा में गुरु अभय बनाता है।अभेद की भिक्षा देता है।अमन की भिक्षा,आश्रय देता है और अश्रु प्रदान करता है। जब युद्ध अनिवार्य हुआ तो राम और रावण के बीच भीषण युद्ध के बाद रावण को गति देकर पुष्पकारुढ होकर अयोध्या में प्रवेश किया। निज भवन मैं सबसे पहले कैकई से मिले, फिर सबको मिले।वशिष्ठ जी ने दिव्य सिंहासन मंगवाकर राम जी के विशाल भाल में राजतिलक किया और सिंहासन पर सिताराम जी की स्थापना करके विश्व को राम राज्य प्रदान किया चारों घाट पर चलती रामकथा के विराम के बाद इस छाया में चल रही रामकथा में सत्य,प्रेम और करुणा जो मानस का सार है वह दिखाकर तुलसी ने भी कथा का विराम किया।

अंत में बापू ने मनोरथी पावन एवं पोपट परिवार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि 983वीं रामकथा का आयोजन 1 से 9 सितंबर तक कर्नाटक के उडुपी में होगा। कथा का सीधा प्रसारण आस्था टीवी और चित्रकूटधाम तलगाजरडा के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा।

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