माणा गांव, चमोली: उत्तराखंड: माणा पास चैलेंज का पहला संस्करण माणा गांव में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्ट्स और एक्सट्रीम-एल्टीट्यूड एंड्योरेंस इवेंट्स के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस इवेंट का आयोजन सारमंग सोसायटी ने इंडियन आर्मी की आइबेक्स ब्रिगेड के सहयोग से किया। इसमें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ का भी सहयोग रहा। इस इवेंट में माणा गांव, रक्षा प्रतिष्ठानों और उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग आयु वर्ग के रनर्स ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया और देश के सबसे कठिन हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में अपने संकल्प और मजबूती का प्रदर्शन किया।
कुल 88 प्रतिभागियों ने यह इवेंट पूरा किया। यह इवेंट माणा गांव, जिसे भारत का पहला गांव कहा जाता है, से आगे ऐतिहासिक माणा पास रोड पर आयोजित किया गया। इस रूट में हिमालय का कठिन पहाड़ी इलाका शामिल था, जिसमें कच्चे रास्ते, ढीले पत्थर, पानी के रास्ते, बर्फ से ढके हिस्से, ग्लेशियर क्षेत्र और सड़क निर्माण वाले क्षेत्र शामिल थे। 50,000 मी, 10,000 मी और 5,000 मी इवेंट्स माणा पास रोड पर देवताल से शुरू हुए, जो समुद्र तल से लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस कारण यह दुनिया के सबसे ऊंचे रोड रेसिंग इवेंट्स में से एक बन गया। 50,000 मी, 10,000 मी और 5,000 मी रेस को 7 असम रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शिवेश तिवारी ने फ्लैग ऑफ किया।
हालांकि यह इवेंट नॉन-कॉम्पिटिटिव एंड्योरेंस चैलेंज के रूप में आयोजित किया गया था, फिर भी कई प्रतिभागियों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया। ज्योति फर्त्याल ने 50 किलोमीटर की चुनौती 5 घंटे 55 मिनट में पूरी की, जबकि मेजर प्रत्यूष नेगी ने यही दूरी 6 घंटे 10 मिनट में पूरी की। दोनों ने हाई एल्टीट्यूड पर असाधारण सहनशक्ति का प्रदर्शन किया। सभी फिनिशर्स को कर्नल शिवेश तिवारी, माणा गांव के ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान और सारमंग ग्रुप के फाउंडर अनिल मोहन द्वारा स्मृति पदक दिए गए। माणा पास रोड भारत की सबसे महत्वपूर्ण पहाड़ी सड़कों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने वाली यह सड़क उत्तराखंड की सबसे ऊंची सड़क, भारत की तीसरी सबसे ऊंची सड़क और दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़कों में से एक है।
यह क्षेत्र सीमा क्षेत्र होने के कारण रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, बद्रीनाथ धाम, माणा गांव, व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल, वसुधारा फॉल्स और सतोपंथ रूट जैसे स्थलों के कारण यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से, यह रूट भारत और तिब्बत के बीच एक पुराने व्यापार मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता था। आज यह भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को मजबूत करना और दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में सतत विकास को बढ़ावा देना है। माणा पास चैलेंज, समिट ऑर सरेंडर – एक्सट्रीम एल्टीट्यूड हिमालयन रेस सीरीज का हिस्सा है।
यह सारमंग सोसायटी की एक पहल है, जिसका उद्देश्य जिम्मेदार एडवेंचर टूरिज्म, एंड्योरेंस स्पोर्ट्स और भारत के दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। इस सीरीज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने वाला लद्दाख उमलिंगला चैलेंज भी शामिल है, जो दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड पर आयोजित किया जाता है। इवेंट के बाद सारमंग ग्रुप के फाउंडर अनिल मोहन ने कहा कि पहले संस्करण की सफल पूर्णता यह दिखाती है कि उत्तराखंड के सीमा क्षेत्रों में एडवेंचर टूरिज्म, एंड्योरेंस स्पोर्ट्स और एक्सपीरियेंशियल ट्रैवल की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इस इवेंट का उद्देश्य माणा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, रणनीतिक महत्व, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को सामने लाना है, साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में जिम्मेदार भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
आयोजकों ने इंडियन आर्मी, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन, स्थानीय प्रशासन, माणा गांव के निवासियों, वॉलंटियर्स, मेडिकल टीमों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह इवेंट सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। अपने पहले संस्करण की सफल पूर्णता के साथ, माणा पास चैलेंज के उत्तराखंड का एक प्रमुख हाई-एल्टीट्यूड एंड्योरेंस इवेंट बनने की उम्मीद है। यह इवेंट राज्य को माउंटेन स्पोर्ट्स, एडवेंचर टूरिज्म और हिमालयन एक्सप्लोरेशन के प्रमुख डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत करेगा।