उत्तराखण्ड में संस्कृत संवर्धन की नई पहल, सरकार करेगी आयोग का गठन

IMG_20260722_135453

देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग को व्यापक और प्रभावी स्वरूप देने के लिए सरकार ने देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों एवं संस्कृत प्रेमियों से 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में एक नई पहल की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान संस्कृत के संरक्षण और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग के गठन की आवश्यकता पर बल दिया था। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास एवं रोजगार, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां एवं कार्ययोजनाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राज्य सरकार का मानना है कि देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान में संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और आधुनिक समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *