देहरादून। भारतीय जैन मिलन के नेतृत्व में सकल जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी स्मिता परमार जायसवाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान पर कड़ा विरोध जताया। समाज ने बयान को भ्रामक एवं तथ्यहीन बताते हुए मामले में विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की मांग की। भारतीय जैन मिलन की केंद्रीय महिला संयोजिका एवं मीडिया प्रभारी मधु सचिन जैन ने बताया कि जैन धर्म और दिगंबर संतों की पिच्छिका को लेकर दिए गए कथित मिथ्या आरोपों से जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में ज्ञापन सौंपकर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि जैन धर्म अहिंसा, करुणा और “जियो और जीने दो” के सिद्धांत पर आधारित है। समाज का कहना है कि पिच्छिका के निर्माण के लिए मोरों की हत्या किए जाने संबंधी बयान पूरी तरह असत्य है। पिच्छिका प्राकृतिक रूप से झड़ने वाले मोरपंखों से बनाई जाती है और इसका उपयोग सूक्ष्म जीवों की रक्षा के उद्देश्य से किया जाता है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कर, यदि विधि के अनुसार कोई अपराध बनता हो, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई करने की मांग की गई।
साथ ही भविष्य में किसी भी धर्म के प्रतीकों और मान्यताओं के संबंध में तथ्यहीन एवं भ्रामक टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह भी किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, राष्ट्रहित और सामाजिक सेवा के लिए समर्पित रहा है तथा अपनी धार्मिक आस्था और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।
इस दौरान भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नरेश चंद जैन, क्षेत्र-14 के क्षेत्रीय अध्यक्ष संजय जैन, जैन मिलन पारस के अध्यक्ष अंकुर जैन, केंद्रीय महिला संयोजिका एवं मीडिया प्रभारी मधु सचिन जैन, धार्मिक संयोजिका सिम्मी जैन, अजय जैन, प्रतीक जैन, जितेंद्र जैन, सुरेश जैन, पूनम जैन, प्रीति जैन, गौरव जैन, अनिल जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य उपस्थित रहे।